रोज़े के स्वास्थ्य लाभ - रोज़ा रखने पर क्या इंसान को सिवाय मज़हबी फ़ायदे के और भी कुछ फ़ायदा मिलता होगा ?

अक्सर मैं सोचता था.  पिछले कुछ वर्षों में अपने शरीर का वज़न घटाने के लिए मैंने बहुत सी चीज़ों का अध्ययन किया,  उसी बीच रोज़े के बारे में ये हैरान कर देने वाली बातें मुझे पता चलीं.

कुछ वर्षों पहले पश्चिम के विशेषज्ञ शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च ये जानने के लिये की कि धार्मिक कारणों से जिस प्रकार यहूदी, इस्लामी और ईसाई धर्मावलम्बी दिन के लंबे समय तक के लिए रोज़ा रखते है और बहुत सीमित समय में कुछ खाते पीते हैं तो इस परिवर्तन का शरीर पर अच्छा या बुरा, किस प्रकार का प्रभाव पड़ता है ?

और आप जानते हैं,  कि इस शोध के जो नतीजे आये वो बहुत दिलचस्प रहे.   पता चला कि दिन के इतने लंबे समय तक कुछ न खाने पीने का कोई भी हानिकारक प्रभाव एक आम मनुष्य पर नही पड़ता, बल्कि बहुत सारे आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति को ऐसे रोज़ा रखने से मिलते हैं, सबसे पहले तो ये फास्टिंग आज के ज़माने में मोटापा घटाने की सबसे कारगर विधि बनके उभरी है,  इसे इंटर्मिटेंट फास्टिंग कहा जाता है,  सबसे कॉमन तरीका है कि आप दिन में केवल 8 घण्टों की विंडो में ही जो कुछ खाना होगा खाएंगे, शेष 16 घण्टे के समय में कुछ भी नही खाएंगे, तब भूखे रहने के समय में आपके शरीर में ग्लाइकोजिन का निर्माण बन्द हो जाएगा और शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए शरीर में जमा हो गई वसा को जलाने लगेगा,   सामान्य डायटिंग में जहाँ कमज़ोरी आने, रक्ताल्पता, चक्कर आने और बाल गिरने आदि की समस्या हो जाती है, वहीँ इंटर्मिटेंट फास्टिंग में ऐसा कोई साइड इफेक्ट नही बल्कि अन्य कई और तरह के लाभ ही शरीर को मिलते हैं, इसीलिये वज़न घटाने की ये विधि दिनोंदिन पूरे विश्व में प्रसिद्ध होती जा रही है.  ऐसे फ़ास्ट को रखने पर मनुष्य के शरीर में अंदर ही अंदर जो हार्मोनल बदलाव आते हैं वो काफी सुखद होते हैं,  इससे बॉडी ग्रोथ हार्मोन बढ़ता है, जिससे आपकी हड्डियां और मासपेशियां मज़बूत होती हैं, हार्मोन्स में ऐसा परिवर्तन भी आता है कि आपकी स्मरण शक्ति बढ़ जाती है, और दूसरी ओर आपका मूड खुद ब खुद बहुत अच्छा रहने लगता है, तनाव दूर भागता है.

इस फास्टिंग से आपको हृदय रोगों का खतरा भी कम हो जाता है, और फिर आपका आपका मेटाबॉलिज़्म भी अच्छा होता है, अच्छे मेटाबॉलिज़्म के कारण ही बहुत से लोग बहुत ज्यादा खाकर भी दुबले पतले रहते हैं,  क्योंकि बढ़िया मेटाबॉलिज़्म का काम है कि आप जो भी खाएं, उससे सारे पौष्टिक तत्व लेकर पूरे शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों में बाँट दे, त्वचा, बाल, हड्डियों, आँखों आदि की सेल रिपेयरिंग में लगा दे जिससे व्यक्ति का हर अंग ज़्यादा युवा बना रहे,  बचपन और नवयुवा अवस्था में अमूमन लोगों का मेटाबॉलिज़्म अच्छा रहता है, पर उम्र के साथ खराब होने लगता है, इसी कारण उनकी सेल रिपेयरिंग की गति बहुत धीमी हो जाती है, त्वचा, बालों, आँखों, हड्डियों सबपर बुढ़ापा छाने लगता है, क्योंकि मेटाबॉलिज़्म कमज़ोर हो जाने से उनके खाये गए खाने का अधिकांश भाग चर्बी बनकर शरीर में जमा होने लगता है, और थोड़ा सा भाग शरीर के अन्य अंगों को ऊर्जा देने मे खर्च होता है.

तो इंटर्मिटेंट फास्टिंग इसी मेटाबॉलिज़्म को अच्छा करती है, जिससे आश्चर्यजनक रूप से आपके भीतर एज रिवर्सिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, यानी आपकी बूढ़ी हो रही त्वचा, सफेद हो रहे बाल, और कमज़ोर हो रहे शारीरिक अंग फिर से युवा होना शुरू हो जाते हैं, व्यक्ति अंदर और बाहर दोनों तरफ से जवान और ताकतवर बन जाता है, फुर्तीला बन जाता है, उस की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगती है जिससे वो निरोगी बनने लगता है,  सोचिये इंसान और क्या चाहता है ?

इसके अलावा शोध ये बताते हैं कि इंटर्मिटेंट फास्टिंग से इंसान की आयु भी बढ़ती है, यानी वो रोज़ा न रखने वाले मनुष्यों की तुलना में ज़्यादा जीता है !!

बहुत ही बढ़िया लगा मुझे ये जानकारी पाकर.   बस ये सारे लाभ पाने के लिए इंसान रोज़े में कुछ गलतियां करने से बचे,  एक तो रोज़ा खोलकर पकौड़े समोसे खाने का मोह छोड़कर ताज़े फलों और पानी से रोज़ा खोले, रिफाइंड शूगर और ऐसे ही अन्य रिफाइंड पदार्थ रोज़ा खोलकर भी बिलकुल न ले (यानी, रिफाइंड तेल और मैदा आदि से बने खाने न ले)   और खाने पीने की छूट मिलने पर ओवरईटिंग न करे, बल्कि संयत रूप से खाना खाएं, फल, सलाद, मट्ठा, दही, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज, खमीरीकृत खाने, फाइबर युक्त भोजन से थोड़ा सा खाली रहता हुआ ही पेट भरे.  ये फास्ट सबके लिए बहुत लाभकारी है, बस ह्रदय व डायबिटीज़ के रोगियों, गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं के लिये इसे आदर्श नही माना जाता, उनके लिए ऐसा फ़ास्ट रखने पर समस्याएं हो सकती हैं !

साउथर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का एक अध्ययन के आधार पर ये कहना है कि तीन दिन तक रोज़ा रखने मात्र से ही से व्यक्ति का पूरा इम्युन सिस्टम रीजेनरेट हो जाता है, यानी इम्यूनिटी बढाने के लिए रोज़े रखना बड़ा कारगर उपाय है
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रकार की फास्टिंग उन लोगों के लिए कारगर साबित हो सकती है जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो, ऐसे कैंसर पेशेंट्स जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कीमोथेरेपी के कारण क्षीण हो गई हो, व वृद्धावस्था के कारण कम हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता के मामलों में भी रोज़ा रखने का प्रयोग कारगर सिद्ध हो सकता है