अक्सर इस्लाम विरोधी लोग इस्लाम मे स्त्रियों के अधिकारों, या मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगाते हुए ऐसी किताबों और ऐसे लेखकों के सन्दर्भ, उनके इस्लामी साहित्य और विद्वान होने का दावा करते हुए देते हैं , जिन किताबों और लेखकों के मुस्लिमों ने कभी नाम भी नहीं सुने होते, सवाल ये उठता है कि इन किताबों और लेखकों का इस्लाम मे कितना औचित्य है ?
इस्लाम की मान्यता के अनुसार केवल एक किताब यानी पवित्र कुरान पूरी तरह प्रमाणिक और विश्वसनीय किताब है, यही कुरान पाक सम्पूर्ण इस्लामी ज्ञान का स्रोत है, हदीस इकट्ठा करने वाले मुहद्दिसो ने भी हदीस की सत्यता परखने के लिए पवित्र कुरान को पैमाना बनाया .
इमाम बुखारी ने 6 लाख जो हदीसे इकट्ठा की, उनमें से अधिकतर उन्हें कुरान की शिक्षा के विपरीत लगीं, यानी हदीस याद रखने वाले उसे अधिकतर सही रूप मे याद नहीं रख पाए थे, तो इमाम बुखारी ने 6 लाख मे से केवल वही हदीस चुनी जिन्हें उन्होंने ठीक कुरान की शिक्षा के अनुकूल पाया । ये हदीसे कुछ हजार बैठी.
इसी तरह अन्य मुहद्दिसो ने भी कुरान की शिक्षा के अनुकूल ही हदीस संकलित करने का प्रयास किया, ऐसे हदीस संकलन की छह किताबों को ( बुखारी, मुस्लिम, तिबरानी, निसाई, इब्ने माजाह , अबू दाऊद ) विश्व भर के मुस्लिम विद्वानों ने प्रमाणिक बताया है, हालांकि मानवीय भूल चूक से इन छह किताबों के भी खाली होने का दावा नहीं, पर अधिकतर ये सभी संकलन कुरान के अनुरूप ही बात कहते हैं.
तो, जिसे भी इस्लाम की तालीम लेनी है वो कुरान पहले पढता है, फिर हदीस की शिक्षा का कुरान की शिक्षा से मिलान करने के बाद ही उसे अपनाता है ॥
और इन स्रोतों यानी पवित्र कुरान और छह हदीसों के अतिरिक्त बाकी साहित्य इस्लाम के विश्वास निर्धारित करने मे कोई भी भूमिका अदा नहीं करते, विशेषकर तब जब इनकी शिक्षा कुरान के ठीक विपरीत जाती हो. और ऐसे संदिग्ध स्रोतों के कारण इस्लाम पर लगाए गए मानवाधिकार हनन के आरोपों का जवाब देने के लिए मुस्लिम बाध्य भी नहीं होते हैं क्योंकि इस्लाम इन संदिग्ध स्रोतों से अप्रभावित होता है, ये बात सभी मुस्लिमों और गैरमुस्लिमो को भी ध्यान मे रखना चाहिए ॥
By- Zia imtiyaz

