क्या हम धरती पर जन्नत की नेमतों स्वरूप की कल्पना कर सकते है

Jannat

एक भाई का कहना है कि //अरब के 1400 साल पहले के लोग, भूख, गुलामी और प्राकृतिक अत्याचार सहने वाले, जिन लोगों को आज की आधुनिक दुनिया की अगर एक भी झलक दिखा दी जाती तो वो क्या दूध की नदियाँ और शहद के झरने वाली जन्नत के लिए आगे आते ?

एयर कंडीशन घर, माल्स, गाड़ियाँ और हवाई जहाज़, मल्टीप्लेक्स और एम्यूजमेंट पार्क. बुलेट ट्रेन, क्रूज़ औए फेरारी, रोबोट्स, कंप्यूटर और इन्टरनेट .. इसकी एक भी झलक धर्मग्रंथो में नहीं मिलती है, क्यूँ वो लोग सोच ही न सके की ऐसा भी होगा आने वाले टाइम में इस दुनिया में.

और हम मरे जा रहे हैं दूध की नदियों और 72 हूरों के लिए.  कभी अपने आस पास निगाह उठा के देखा भी है ठीक से की कहाँ से कहाँ पहुँच चुकी है दुनिया? हमारी जन्नत का कोई औचित्य नज़र भी आता है अब?//

मेरा जवाब :-
भाई आप क्यों मरे जा रहे हो 72 हूरों के लिए . आपको मरना चाहिए किसी मज़लूम की जान की हिफाज़त के लिए किसी गरीब मोहताज की गरीबी दूर करने के लिए, किसी मजबूर के काम आने के लिए .

अफसोस . आपको जन्नत मे तमाम ऐशो आराम की तो बड़ी फिक्र है , कि वहाँएयर कंडीशन घर, माल्स, गाड़ियाँ और हवाई जहाज़, मल्टीप्लेक्स और एम्यूजमेंट पार्क.  बुलेट ट्रेन, क्रूज़ औए फेरारी, रोबोट्स, कंप्यूटर और इन्टरनेट सब कुछ हो पर जन्नत के हकदार कैसे बनें इसकी आपको फिक्र ही नहीं .

वैसे आपको एक हकीकत बता दूँ कि जन्नत मे कुछ भी ऐसा नहीं होगा जिसकी मिसाल दुनियावी चीज़ों से दी जा सके न पहले की दूध की नदियाँ जन्नत की नियामतों की सही सही तस्वीर पेश कर सकती थीं, न ही आज की एयर कंडीशन घर, माल्स, गाड़ियाँ और हवाई जहाज़, मल्टीप्लेक्स और एम्यूजमेंट पार्क.. बुलेट ट्रेन, क्रूज़ औए फेरारी, रोबोट्स, कंप्यूटर और इन्टरनेट जैसी चीजें ही जन्नत की नियामतों की मिसाल ठीक ठीक पेश कर सकती हैं .

बैहकी शरीफ मे साफ तौर पर हदीस बयान की गई है कि जन्नत की नियामतों और दुनिया की चीजो मे केवल नाम की समानता है. बाकी उन जन्नत की नियामतों की कल्पना तक करना हमारे लिए मुश्किल है 
मुस्लिम शरीफ मे हदीस है कि जन्नत की नियामतें ऐसी होंगी जो न दुनिया मे कभी किसी ने देखी होंगी न कभी सुनी होगी और न ही कभी उनकी कल्पना की होगी

जाहिर है कि उस जन्नत की वास्तविकता को हम यहाँ इस धरती पर समझ नहीं सकते। इस लिए हमारी भाषा में जो आराम, और खूबसूरती के दृश्य हैं, उनही की मिसाल दे कर कुरआन में बात को समझाया गया है .  और हर दौर के इनसान को समझाया गया है .  आपके फ्रिज टीवी वगैरह न 1400 साल पहले के आदमी को समझ आते न ही आज से 1400 साल बाद के लोगों को समझ आएंगे क्योंकि तब तक बहुत से नए अविष्कार हो जाएंगे और फ्रिज टीवी वगैरह भूली बिसरी चीजें हो जाएंगी.  इसलिए भाई सोच का दायरा बड़ा करो . ऐसी हास्यास्पद बातें न किया करो