Muhammad ﷺ ek Ansari ke Bagh main gaye to samne ek oont (Camel) ko dekha, Jab oont nay Nabi ﷺ ko dekha to Rone laga Aur Uski ankhon se Ansu Bahne lage, Muhammad ﷺ uske pass Gaye Uske sar par Hath phera to wo Khamosh Ho gaya, Uske baad puchha ke oont kis ka hain? Ek Ansari aaya, Wo kehne laga Allah ke Rasool mera hain, Muhammad ﷺ nay Farmaya Kya tum un janwaro ke mamlo main Allah se nahi darte Jinka Malik Allah nay tumhe banaya hain, Us Oont nay mujhse sikayat ki hain ki tum usko Bhukha Maarten aur thakate ho.
- Source : Sunan Abi Dawud 2549
मदीना शरीफ़ के मज़हबी रहनुमाओं को गलत कहने से पहले लोगों को नबी ﷺ की वो हदीस याद कर लेनी चाहिए जिसका मफहूम ये है कि इस्लाम जिस तरह नाकाबिल ए यकीन तरीके से सारी दुनिया मे फैला , उसी तरह ये एक दिन सिमट कर सिर्फ दो मस्जिदों के बीच तक ही महदूद रह जाएगा जैसे एक रेंगने वाली मखलूक (दिनभर घूम कर) वापस अपने बिल मे लौट जाती है, दीगर अहादीस से ज़ाहिर है कि ईमान मदीना से दुनिया मे फैला और एक दिन इस्लाम वापस मदीना मे लौट आएगा और सिर्फ मदीना शरीफ़ तक सिमट कर रह जाएगा
सही मुस्लिम , किताब-1, हदीस-271, 272; सही बुखारी, किताब-30, हदीस-100 और दीगर मकामात पर भी इस मौजू की अहादीस तहरीर की गई हैं
आप ﷺ सहाबा के बीच माले गनीमत तकसीम कर रहे थे, तो एक शख्स ने नबी ﷺ से बदतमीज़ी की हज़रत उमर रज़ि. ने तलवार लेकर उस बदतमीज़ शख्स का सर काट लेने की इजाज़त नबी ﷺ से मांगी, तो आप ﷺ ने हजरत उमर रज़ि. को ऐसा करने से मना किया और भविष्यवाणी की कि ऐसे ही गुस्ताख लोग आगे भी होंगे जो बहुत इबादत करेंगे मगर दीन से ऐसे बेअसर निकल जाएंगे जैसे तीर शिकार के जिस्म से ऐसे पार हो जाता है कि उसपर शिकार के खून का एक भी कतरा नहीं होता
सही मुस्लिम शरीफ़, किताब 5, हदीस 2323
आप ﷺ ने अपने अंतिम हज के समय मुसलमानो को सावधान करते हुए फरमाया है "कि मेरे जाने के बाद आपस मे खून खराबा कर के वापस "जाहिलियाह" (मुस्लिम बनने से पहले की स्थिति) मे न लौट जाना"
सही मुस्लिम, 1/124




